प्रयागराज महाकुंभ भगदड़ हादसा: 10 से ज्यादा की मौत, प्रशासन पर उठे सवाल
प्रयागराज, 29 जनवरी 2025 – मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम तट पर जुटी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से दर्दनाक हादसा हुआ। इस भगदड़ में 10 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हो गए। हादसे के बाद प्रशासन पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कैसे हुआ हादसा?
मौनी अमावस्या के स्नान के लिए प्रयागराज में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी। संगम तट पर अधिकतर लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के इंतजार में बैठे थे। इस दौरान अचानक भगदड़ मच गई। चश्मदीदों के मुताबिक:
- कुछ श्रद्धालु तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।
- वहां मौजूद बुजुर्ग और महिलाएं भीड़ के दबाव में गिर गए।
- भगदड़ में फंसे लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए, जिससे अफरातफरी मच गई।
- पुलिस प्रशासन की तुरंत कार्रवाई के बावजूद, हादसा गंभीर हो गया।
चश्मदीदों ने बताया कि भगदड़ के दौरान चीख-पुकार मच गई, लेकिन लोग एक-दूसरे को बचाने के बजाय खुद को सुरक्षित करने में जुटे रहे।

प्रशासनिक लापरवाही या भीड़ का दबाव?
महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी जी महाराज ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि:
“हमने पहले ही प्रशासन को चेताया था कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सेना की मदद ली जाए। लेकिन, उचित व्यवस्था न होने के कारण आज श्रद्धालुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी।”
कुंभ प्रशासन के दावे और हकीकत
- प्रशासन का दावा: पूरी सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन अचानक भगदड़ हुई।
- श्रद्धालुओं का आरोप: सुरक्षा में भारी चूक हुई, पुलिस सही से भीड़ नियंत्रित नहीं कर पाई।

हादसे के बाद क्या कदम उठाए गए?
- घायलों को निकटवर्ती अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
- प्रशासन ने संगम तट पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया।
- मौनी अमावस्या स्नान के दौरान संगम तट पर प्रवेश नियंत्रित कर दिया गया।
श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा निर्देश
- पुलिस प्रशासन की गाइडलाइंस का पालन करें।
- भीड़ के दबाव में न आएं, धैर्य बनाए रखें।
- स्नान के लिए वैकल्पिक घाटों का भी उपयोग करें।
निष्कर्ष
प्रयागराज महाकुंभ में हुआ यह हादसा सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। इस हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इससे क्या सबक लेता है और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।