Ind vs NZ : भारत बनाम न्यूज़ीलैंड तीसरा वनडे: ऐतिहासिक जीत की पूरी कहानी
एक साल से थोड़ा ज़्यादा समय पहले भारत में अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ जीतने वाली न्यूज़ीलैंड टीम ने अब एक और इतिहास रच दिया है। इस बार उन्होंने भारत को उसी के घर में वनडे सीरीज़ में पहली बार हराया। चोटों से जूझती, कई अहम खिलाड़ियों के बिना आई इस टीम ने 1-0 से पिछड़ने के बाद ज़बरदस्त वापसी करते हुए 2-1 से सीरीज़ अपने नाम कर ली। इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेले गए तीसरे और निर्णायक मुकाबले में न्यूज़ीलैंड ने भारत को 41 रनों से हराकर यह कारनामा किया।
न्यूज़ीलैंड की पारी: मिशेल–फिलिप्स का तूफ़ान
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए न्यूज़ीलैंड ने 50 ओवर में 337/8 का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस पारी के नायक रहे Daryl Mitchell और Glenn Phillips। दोनों ने मिलकर चौथे विकेट के लिए 219 रनों की साझेदारी की, जिसने मैच की दिशा ही बदल दी।
मिशेल ने 137 रनों की शानदार पारी खेली। यह इस सीरीज़ में उनका दूसरा शतक था और भारत के खिलाफ कुल मिलाकर चौथा। खास बात यह रही कि भारत की पिचों पर यह उनका चौथा शतक भी था। वहीं फिलिप्स ने 88 गेंदों में 106 रन ठोक दिए। उनकी पारी में ताक़त और टाइमिंग का बेहतरीन मेल दिखा। जब दोनों क्रीज़ पर थे, ऐसा लग रहा था कि न्यूज़ीलैंड 350 से भी ऊपर निकल जाएगा।
भारतीय गेंदबाज़ों में Arshdeep Singh और Harshit Rana ने तीन-तीन विकेट लिए, जबकि Mohammed Siraj ने भले ही विकेट न लिया हो, लेकिन 10 ओवर में सिर्फ 43 रन देकर शानदार अनुशासन दिखाया।
भारत की शुरुआत: सपनों पर शुरुआती झटके
337 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम जल्दी ही 71/4 के स्कोर पर सिमट गई। उस समय लग रहा था कि मैच हाथ से निकल चुका है। इस मैच में भारत को Hardik Pandya और Axar Patel की कमी साफ़ खली, जिससे निचले क्रम पर सवाल खड़े हो गए।
विराट कोहली की ऐतिहासिक जंग
ऐसे मुश्किल समय में एक बार फिर Virat Kohli भारत की उम्मीद बनकर खड़े हुए। कोहली ने 124 रनों की यादगार पारी खेली, जो उनका 54वां वनडे शतक था। यह पारी तीन अलग-अलग चरणों में बंटी हुई थी।
पहला चरण आक्रामक था। कोहली ने तेज़ गेंदबाज़ों पर चढ़कर खेला और शुरुआत के 24 गेंदों में चार चौके और एक छक्का जड़ दिया। दूसरा चरण पूरी तरह संयम और समझदारी का था। विकेट गिरते देख कोहली ने जोखिम कम किया और 52 गेंदों में सिर्फ एक बाउंड्री के साथ 47 रन जोड़े।
तीसरा चरण धमाकेदार था। जब टीम को 160 रन लगभग 9 रन प्रति ओवर की दर से चाहिए थे, तब कोहली ने गियर बदल दिया। उन्होंने 74 से 100 रन तक का सफर महज़ 15 गेंदों में पूरा किया और स्टेडियम में जान डाल दी।
युवा खिलाड़ियों का साहस
कोहली का साथ देने आए दो युवा खिलाड़ी – Nitish Kumar Reddy और हरशित राणा। दोनों ने अपना पहला वनडे अर्धशतक जमाया। राणा ने सिर्फ 41 गेंदों में 50 रन बनाकर दिखा दिया कि उनमें बड़े मैचों का दबाव झेलने की काबिलियत है।
लेकिन राणा के आउट होते ही भारत की सारी उम्मीदें एक बार फिर सिर्फ कोहली पर टिक गईं। जब कोहली 9वें विकेट के रूप में आउट हुए, तब भारत को 27 गेंदों में 46 रन चाहिए थे। यहीं पर मैच पूरी तरह न्यूज़ीलैंड की पकड़ में चला गया।
न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़: सामूहिक जीत
न्यूज़ीलैंड की जीत सिर्फ बल्लेबाज़ों की नहीं थी, बल्कि गेंदबाज़ों की सामूहिक मेहनत का नतीजा भी थी। Kyle Jamieson ने नई गेंद से बेहतरीन सीम मूवमेंट दिखाते हुए शुभमन गिल को आउट किया। Jayden Lennox ने अपने दूसरे ही वनडे में 10 ओवर में 42 रन देकर 2 विकेट लिए।
इसके अलावा Zak Foulkes और Kristian Clarke ने तीन-तीन विकेट चटकाए। स्पिन विभाग में फिलिप्स और Michael Bracewell ने मिलकर भारतीय मध्यक्रम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
स्पिन बनाम स्पिन: फर्क यहीं पड़ा
इस सीरीज़ में एक बड़ा फर्क स्पिन गेंदबाज़ी का रहा। भारत के Kuldeep Yadav और Ravindra Jadeja ने कुल मिलाकर सिर्फ 12 ओवर डाले और 89 रन लुटा दिए। वहीं न्यूज़ीलैंड के स्पिनरों ने सटीक लाइन-लेंथ और वैरिएशन से भारत को लगातार दबाव में रखा।
निष्कर्ष: एक यादगार सीरीज़
इंदौर की पिच, जहां बड़े स्कोर बनना आम बात है, वहां 337 रन का लक्ष्य किसी भी टीम के लिए संभव माना जाता है। लेकिन न्यूज़ीलैंड ने हर विभाग में भारत से बेहतर प्रदर्शन किया। विराट कोहली की जुझारू पारी के बावजूद यह दिन न्यूज़ीलैंड के नाम रहा।
यह जीत सिर्फ एक मैच या सीरीज़ की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, रणनीति और टीमवर्क की जीत थी। भारत के लिए यह हार आत्ममंथन का मौका है, जबकि न्यूज़ीलैंड के लिए यह उपलब्धि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स से पहले एक बड़ा संदेश है।
