AIFF की ISL क्लबों के लिए 20 साल की योजना: ₹1 करोड़ भागीदारी शुल्क, प्रमोशन-रिलिगेशन और जून-मई सीज़न

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AIFF की ISL क्लबों के लिए 20 साल की योजना: ₹1 करोड़ भागीदारी शुल्क, प्रमोशन-रिलिगेशन और जून-मई सीज़न
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AIFF की ISL क्लबों के लिए 20 साल की योजना: ₹1 करोड़ भागीदारी शुल्क, प्रमोशन-रिलिगेशन और जून-मई सीज़न

AIFF 20-Year Plan for ISL Clubs | Indian Super League Latest News in Hindi

ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने इंडियन सुपर लीग (ISL) क्लबों के सामने एक 20 साल की दीर्घकालिक योजना रखी है, जिसमें टॉप-डिवीजन लीग का स्वामित्व और संचालन AIFF के पास होगा। यह लीग जून से मई के पारंपरिक फुटबॉल कैलेंडर पर चलेगी और केंद्रीय राजस्व का 50 प्रतिशत हिस्सा बराबर सभी भाग लेने वाले क्लबों में बांटा जाएगा।

यह प्रस्ताव उस समय सामने आया है जब AIFF ने हाल ही में ISL क्लबों की उस योजना को खारिज कर दिया था, जिसमें क्लब खुद लीग के मालिक बनना चाहते थे। यह नया प्रस्ताव घरेलू फुटबॉल सीज़न की ठप स्थिति को दोबारा शुरू करने के लिए बनाई गई समिति की बैठक के बाद आया, जिसमें AIFF और ISL क्लबों के अधिकारी शामिल थे।

क्लबों ने बताया ‘मजबूत आधार’

नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी के सीईओ मंदर ताम्हाणे ने कहा कि AIFF का प्रस्ताव आगे की बातचीत के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।
उन्होंने कहा,

“क्लब अब इस प्रस्ताव पर आंतरिक चर्चा करेंगे और फिर AIFF को अपनी प्रतिक्रिया देंगे। शुरुआती तौर पर यह योजना ठोस लगती है।”

AIFF और ISL क्लबों की अगली बैठक 29 दिसंबर को नई दिल्ली में होगी।

AIFF का नया मॉडल क्या है?

AIFF के प्रस्ताव के अनुसार:

  • फेडरेशन कुल राजस्व का 10% हिस्सा अपने पास रखेगी, जो पहले FSDL द्वारा प्रस्तावित 14% से कम है।
  • ISL का पहला सीज़न ₹70 करोड़ के ऑपरेशनल बजट के साथ चलेगा।
  • हर क्लब को सालाना ₹1 करोड़ की ‘स्टैंडर्ड पार्टिसिपेशन फीस’ देनी होगी।
  • यह राशि बाद में सेंट्रल रेवेन्यू पूल से वापस (Reimburse) कर दी जाएगी।
  • लीग का संचालन एक बोर्ड करेगा, लेकिन अंतिम वित्तीय नियंत्रण AIFF के पास रहेगा
  • प्रमोशन और रिलिगेशन सिस्टम बरकरार रहेगा, ताकि खेल की प्रतिस्पर्धा और मेरिट बनी रहे।

FSDL और ISL डील का संदर्भ

2014 में ISL की शुरुआत से अब तक लीग का संचालन फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (FSDL) कर रहा था, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की सहयोगी कंपनी है।
हालांकि, AIFF और FSDL के बीच समझौता 8 दिसंबर को समाप्त हो गया और FSDL ने नए टेंडर में कोई आधिकारिक बोली नहीं लगाई।

अब भी कई चिंताएँ बाकी

हालाँकि प्रस्ताव व्यापक है, लेकिन क्लबों के बीच अब भी कई सवाल बने हुए हैं:

  • बढ़ती लागत और खिलाड़ियों की सैलरी कैप
  • निवेश की सुरक्षा (Investment Security)
  • ISL 2025-26 सीज़न की शुरुआत को लेकर अनिश्चितता
  • ब्रॉडकास्ट पार्टनर और प्रसारण गुणवत्ता, खासकर तब जब Star Sports अब ISL का सह-मालिक नहीं रहा

निष्कर्ष

AIFF की 20 साल की योजना भारतीय फुटबॉल के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला क्लबों की सहमति और आगे की बातचीत पर निर्भर करेगा। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि ISL का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

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