विराट कोहली, रोहित शर्मा और अब शुभमन गिल: गौतम गंभीर और अजीत अगरकर ने कैसे स्टार कल्चर को लगातार नकारा
भारत जैसे देश में, जहाँ VIP संस्कृति गहराई तक रची-बसी है—
जहाँ सायरन लगी गाड़ियों के लिए ट्रैफिक रुक जाता है,
अस्पतालों में खास काउंटर और अलग कतारें होती हैं,
और टोल नाकों पर विशिष्ट वर्ग को छूट मिलती है—
वहीं भारतीय क्रिकेट ने इस स्थापित विशेषाधिकार की सोच को खुली चुनौती दी।
भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और मुख्य कोच गौतम गंभीर को उनकी चयन नीतियों के लिए कठघरे में खड़ा किया जा सकता है, उनके इरादों पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन एक बात साफ है—
उन्होंने स्टार कल्चर को टीम से ऊपर रखने से साफ इनकार कर दिया।
2025: जब भारतीय क्रिकेट ने ‘अन-इंडियन’ फैसले लिए
जिस साल दुनिया ने मोटापे के खिलाफ इंजेक्शन लिए और पतली होने लगी, उसी साल भारतीय क्रिकेट ने भी अपने भारी-भरकम नामों को किनारे करने का साहसिक फैसला लिया।
साल 2025 को भारतीय क्रिकेट के इतिहास में उन फैसलों के लिए याद किया जाएगा, जो अब तक “अकल्पनीय” माने जाते थे।
विराट और रोहित का टेस्ट से बाहर होना
सबसे पहले, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों को यह साफ संदेश दिया गया कि टेस्ट क्रिकेट में अब उनकी जरूरत नहीं है।
यह फैसला सिर्फ क्रिकेटिंग नहीं, बल्कि मानसिकता में बदलाव का प्रतीक था—
जहाँ नाम नहीं, फॉर्म और भविष्य प्राथमिकता बने।
शुभमन गिल का चौंकाने वाला ड्रॉप
इसके बाद साल के अंत में,
टी20 वर्ल्ड कप (भारत में) से महज एक महीने पहले,
भारतीय क्रिकेट ने एक और बड़ा झटका दिया—
- टेस्ट कप्तान
- वनडे कप्तान
- टी20I उप-कप्तान
शुभमन गिल को टीम से बाहर कर दिया गया।
यह फैसला बताता है कि अब कोई भी नाम सिस्टम से बड़ा नहीं है।
गंभीर–अगरकर युग की पहचान
गौतम गंभीर और अजीत अगरकर के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट ने यह साफ कर दिया है कि—
- चयन में भावनाएँ नहीं होंगी
- नाम से नहीं, प्रदर्शन से जगह मिलेगी
- भविष्य की टीम आज बनाई जाएगी
यह युग स्टार कल्चर से सिस्टम कल्चर की ओर बढ़ने का संकेत है।